मैं पैसे से एक शिक्षक हूँ और लिखने का भी शौक रखता हूँ। अपनी सोच आप सबके सामने रख रहा हूँ कृपया कोई भी गलत टिप्पणी ना करे।
निजीकरण के बढ़ते पैर
वो दिन दूर नहीं होगा कि गृह युद्ध की स्थिति पैदा ना हो।
बेरोजगार युवाओं को दिन-प्रतिदिन गुमराह किया जा रहा है। देश में बेरोजगारी एक दिन अपनी चरम सीमा पर हो जाएगी। देश प्रदेश में हर पाँच साल बाद विधायकों, सांसदों मंत्रियों के वेतन में वृद्धि की जाती है, हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाईं जाती हैं और एक बेरोजगार युवा योग्य होते हुए भी दर दर भटकता है, हर सम्भव कोशिश करता है, आखिर में थक हारकर उसके सपनों की चिता जल जाती है। क्या मजबूरी होती है या फिर क्या कमी होती है जो बेरोजगार युवा अपने सपने पूरा नहीं कर सकता।
ऐसी क्या मजबूरी है जो सरकार इन युवाओं के भविष्य की ओर ध्यान नहीं दे रही है? क्या ये युवा इस प्रदेश या फिर देश के नहीं हैं?
सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है? कौन जिम्मेदार है इस निजीकरण के पीछे कोई बता सकता है??? आखिर क्या मजबूरी है कि सरकारी संस्थाओं को निजीकरण के हवाले किया जा रहा है???
मैं उन सभी सरकारी कर्मचारियों से पूछना चाहूंगा कि क्या वे अपने लड़के लड़कियों को हर प्रकार से निजी व्यवसाय करने योग्य बना सकेंगे जो इस महंगाई की दुनियां में अपना जीवन यापन कर सकेंगे?
अगर निजीकरण के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो वो दिन दूर नहीं होगा जब बंधुआ मजदूरी करने के लिए बेरोजगार युवाओं को बेबस होना पड़ेगा।
मध्य प्रदेश में तो सरकारी स्कूलों का निजीकरण किया जा रहा है उन स्कूलों पर ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों कम होती जा रही है या फिर रिजल्ट अच्छा क्यों नहीं आ रहा है?
इसके पीछे क्या हो सकता है ऐसा ना कभी किसी शिक्षा मंत्री ने सोचा है? क्यों...
अगर समय रहते युवा सचेत ना हुए तो एक दिन सब कुछ हाथ से निकल जाएगा। दिन प्रति दिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और बढ़ती जाएगी। सोचा जाए कि जब अभी बेरोजगारी का ये हाल है तो आने वाले दिनों में तो हर सरकारी संस्थाओं का निजीकरण हो जाएगा और बेरोजगारों की संख्या दो से चार गुनी हो जाएगी तब क्या होगा? बेरोजगारी से बेहाल युवा कहीं गलती से भी गलत रास्ते पर चलने लग गया तो फिर क्या होगा देश का और उन युवाओं का जो मजबूरी बस गलत हो गया??
कौन होगा जिम्मेदार जिसने युवाओं को गलत रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किया??? फिर कोई विधायक या मंत्री ले सकेगा इसकी जिम्मेदारी???
समय रहते सम्भलने की जरूरत है और अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने की जरूरत है।
G.s.Kushwah
निजीकरण के बढ़ते पैर
वो दिन दूर नहीं होगा कि गृह युद्ध की स्थिति पैदा ना हो।
बेरोजगार युवाओं को दिन-प्रतिदिन गुमराह किया जा रहा है। देश में बेरोजगारी एक दिन अपनी चरम सीमा पर हो जाएगी। देश प्रदेश में हर पाँच साल बाद विधायकों, सांसदों मंत्रियों के वेतन में वृद्धि की जाती है, हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाईं जाती हैं और एक बेरोजगार युवा योग्य होते हुए भी दर दर भटकता है, हर सम्भव कोशिश करता है, आखिर में थक हारकर उसके सपनों की चिता जल जाती है। क्या मजबूरी होती है या फिर क्या कमी होती है जो बेरोजगार युवा अपने सपने पूरा नहीं कर सकता।
ऐसी क्या मजबूरी है जो सरकार इन युवाओं के भविष्य की ओर ध्यान नहीं दे रही है? क्या ये युवा इस प्रदेश या फिर देश के नहीं हैं?
सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है? कौन जिम्मेदार है इस निजीकरण के पीछे कोई बता सकता है??? आखिर क्या मजबूरी है कि सरकारी संस्थाओं को निजीकरण के हवाले किया जा रहा है???
मैं उन सभी सरकारी कर्मचारियों से पूछना चाहूंगा कि क्या वे अपने लड़के लड़कियों को हर प्रकार से निजी व्यवसाय करने योग्य बना सकेंगे जो इस महंगाई की दुनियां में अपना जीवन यापन कर सकेंगे?
अगर निजीकरण के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो वो दिन दूर नहीं होगा जब बंधुआ मजदूरी करने के लिए बेरोजगार युवाओं को बेबस होना पड़ेगा।
मध्य प्रदेश में तो सरकारी स्कूलों का निजीकरण किया जा रहा है उन स्कूलों पर ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों कम होती जा रही है या फिर रिजल्ट अच्छा क्यों नहीं आ रहा है?
इसके पीछे क्या हो सकता है ऐसा ना कभी किसी शिक्षा मंत्री ने सोचा है? क्यों...
अगर समय रहते युवा सचेत ना हुए तो एक दिन सब कुछ हाथ से निकल जाएगा। दिन प्रति दिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और बढ़ती जाएगी। सोचा जाए कि जब अभी बेरोजगारी का ये हाल है तो आने वाले दिनों में तो हर सरकारी संस्थाओं का निजीकरण हो जाएगा और बेरोजगारों की संख्या दो से चार गुनी हो जाएगी तब क्या होगा? बेरोजगारी से बेहाल युवा कहीं गलती से भी गलत रास्ते पर चलने लग गया तो फिर क्या होगा देश का और उन युवाओं का जो मजबूरी बस गलत हो गया??
कौन होगा जिम्मेदार जिसने युवाओं को गलत रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किया??? फिर कोई विधायक या मंत्री ले सकेगा इसकी जिम्मेदारी???
समय रहते सम्भलने की जरूरत है और अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने की जरूरत है।
G.s.Kushwah