Friday, April 16, 2021

मेरे देश के हालात

 आज देश के हालात ऐसे हो गए हैं जिसके बारे में कुछ भी नहीं कह सकते हैं।

प्रत्येक क्षेत्र में राजनीति पूरी तरह से हावी हो चुकी है

आज समय प्रत्येक नागरिक को इस महामारी से बचाने का समय है और नेता लोग रैलियां कर रहे हैं और आम जनता को काल के गाल में धकेल रहे हैं।

आज पुलिस वाले भी ग़रीब लोगों को इस महामारी की आड़ में परेशान कर रहे हैं जहाँ जरूरत है वहाँ किसी को कोई परवाह नहीं है। सब नेताओं के जाल में इस तरह फंस चुके हैं कि उन्हें आने वाली पीढ़ियों की भी कोई परवाह नहीं है अगर किसी को भी परवाह भी है तो वह इन बेड़ियों से निकल नहीं पाता है, ऐसा हो गया है मेरा देश। एक मध्यम वर्ग परिवार अपना किसी तरह से गुजारा करता है और किसी दिन उससे गलती से यातायात नियम की अवहेलना होने पर उसको बक्सा नहीं जाता है और हमारे देश के नेता ऐसी अवहेलना जानबूझकर करते हैं तो किसी पुलिस वाले या किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं की उसको किसी भी प्रकार का दण्ड दे सके, ऐसा हो गया है मेरा देश। 

आज समय है गरीब तबके के लोगों की सहायता करने की, उनके परिवार को भूखा ना सोने देना पर इसमें भी कोई कसर नहीं छोड़ता है। 

कहने का सारांश ये है कि ये महामारी वहाँ क्यों नहीं जाती जहाँ नेताओं की रैलियां होती हैं? 

भगवान भी किस तरफ करवट लिए हुए है? 


Sunday, July 26, 2020

देश के अन्य सरपंचों में ऐसा सुधार हो जाए तो किसी की भी सरकार हो सरकार से भरोसा नहीं उठेगा। लेकिन ऐसे सरपंच मिलते कहाँ हैं अब तो सब अपने अपने घर और खुद को समृद्ध करने में लगे हुए हैं।
अमेरिका से लौटी युवती ने सरपंच बन बदल दी मध्य प्रदेश के इस गांव की तस्वीर।
देश के वो प्रधान जिन्होंने सरकारी संसाधनों और अपनी हिम्मत से बदल दी गांवों की तस्वीर है.. ऐसी ही एक प्रधान हैं मध्य प्रदेश की Bhakti Sharma. जिनकी गिनती रोल मॉडल सरपंचों में होती है,
अमेरिका के टेक्सास शहर में अच्छी नौकरी छोड़ लौटी इस युवती ने ग्राम प्रधान बनकर अपने गांव की तस्वीर बदल दी है। एक युवती पंचायत की तस्वीर कैसे बदल सकती है ये देखने के लिए आपको मध्य प्रदेश के भोपाल की इस ग्राम पंचायत में आना होगा। सरपंच भक्ति शर्मा का नाम देश की 100 लोकप्रिय महिलाओं में शामिल है।
"इस पंचायत की खासियत ये है कि यहां की बेटी ही यहाँ की सरपंच हैं, अंग्रेजी में एक कहावत है अगर आप एक पुरुष को पढ़ाते हैं तो आप एक व्यक्ति को पढ़ाते हैं। अगर अपनी बेटी को पढ़ाते हैं तो पूरे परिवार को पढ़ाते हैं, और अगर गांव का सरपंच पढ़ा-लिखा है तो वो पूरी पंचायत को जागरूक करता है।" ये कहना है अमेरिका से लौटी मध्य प्रदेश के भोपाल की एक ग्राम पंचायत में बनी तेज तर्रार सरपंच भक्ति शर्मा (28 वर्ष) का। भक्ति फर्राटेदार अंग्रेजी तो बोलती ही हैं साथ ही निडर होकर अधिकारियों से मिलती जुलती भी हैं। इनकी कोशिश रहती हैं कि हर सरकारी योजना का लाभ इनके पंचायत के लोगों को मिल सके।
भक्ति शर्मा ने एमए राजनीति शास्त्र से किया है, अभी वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भोपाल जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर बरखेड़ी अब्दुल्ला ग्राम पंचायत है। इस पंचायत की सरपंच भक्ति शर्मा के शौक पुरुषों जैसे हैं। इन्हें ट्रैक्टर चलाना, पिस्टल रखना, अपनी गाड़ी से सड़कों पर फर्राटे भरना, किसी भी अधिकारी से बेधड़क बात करना पसंद है। ये अपनी बोलचाल की भाषा में भी जाता है, खाता है, आता हूँ का प्रयोग सामान्य तौर पर करती हैं। इस पंचायत में कुल 2700 जनसँख्या है जिसमे 1009 वोटर हैं। ओडीएफ हो चुकी इस पंचायत में आदर्श आंगनबाड़ी से लेकर हर गली में सोलर स्ट्रीट लाइटें हैं।
बैठक करके ग्रामीणों की सुनती हैं समस्याएं।
"सरपंच बनते ही सबसे पहला काम हमने गांव में हर बेटी के जन्म पर 10 पौधे लगाना और उनकी माँ को अपनी दो महीने की तनख्वाह देने का फैसला लेकर किया। पहले साल 12 बेटियां पैदा हुई, माँ अच्छे से अपना खानपान कर सके इसलिए अपनी यानि सरपंच की तनख्वाह 'सरपंच मानदेय' के नाम से शुरू की।"
भक्ति ने कहा, "हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है।
भक्ति ने कहा, "हमारी पहली ऐसी ग्राम पंचायत बनी जहाँ हर किसान को उसका मुआवजा मिला। हर ग्रामीण का राशनकार्ड, बैंक अकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। पहले साल में 113 लोगों को पेंशन दिलानी शुरू की, इस समय पंचायत का कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है। महीने में दो से तीन बार फ्री में हेल्थ कैम्प लगता है, जिससे पंचायत का हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे।"
अपनी पंचायत में लोगो की चहेती हैं भक्ति शर्मा।
ग्राम पंचायत का कोई भी काम भक्ति अपनी मर्जी से नहीं करती हैं। वर्ष 2016-17 में 10 ग्राम सभाएं हो चुकी हैं, पंचों की बैठक समय-समय पर अलग से होती रहती है। जब ये सरपंच बनी थीं तो इस पंचायत में महज नौ शौचालय थे अभी ये पंचायत ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुकी है। भक्ति का कहना है, "हमने पंचायत में कोई भी काम अलग से नहीं किया, सिर्फ सरकारी योजनाओं को सही से लागू करवाया है। पंच बैठक में जो भी निर्धारित करते हैं वही काम होता है। ढ़ाई साल में बहुत ज्यादा विकास तो नहीं करवा पाए हैं क्योंकि जब हम प्रधान बने थे उस समय गांव की सड़कें ही पक्की नहीं थी, इसलिए पहले जरूरी काम किए।"
हर बेटी के जन्म पर गाँव में लगते हैं 10 पौधे
भक्ति ने अपने प्रयासों से अपनी पंचायत को सरकार की मदद से एक बड़ा सामुदायिक भवन पास करा लिया है। भक्ति का कहना है, "आगामी छह महीने में इस भवन में डिजिटल क्लासेज शुरू हो जायेंगी, जो पूरी तरह से सोलर से चलेंगी। इसमें महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर, और चरखा केंद्र खुलेगा। किसानों के लिए समय-समय पर बैठकें होंगी, जिससे वो खेती के आधुनिक तरीके सीख सकें। बच्चों के लिए तमाम तरह की गतिविधी होंगी जिससे उन्हें गांव में शहर जैसी सुविधाएँ मिल सकें।"
बेटियों से भक्ति शर्मा की अच्छी दोस्ती
महिलाओं पर ख़ास ध्यान
पंचायत की हर महिला निडर होकर रात के 12 बजे भी अपनी पंचायत में निकल सके भक्ति शर्मा की ऐसी कोशिश है। भक्ति ने कहा, "पंचायत की हर बैठक में महिलाएं ज्यादा शामिल हों ये मैंने पहली बैठक से ही शुरू किया। मिड डे मील समिति में आठ महिलाएं है। महिलाओं की भागीदारी पंचायत के कामों में ज्यादा से ज्यादा रहे जिससे उनकी जानकारी बढ़े और वो अपने आप को सशक्त महसूस करें।"
भक्ति शर्मा हैं जाना पहचाना नाम।
जैविक खेती को बढ़ावा, समय-समय पर जैविक खेती के सिखाए जाते हैं तरीके
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से ग्राम पंचायत में पानी की बहुत समस्या है। पीने के पानी के लिए तो सबमर्सिबल लगा है लेकिन खेती को समय से पानी मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। भक्ति का कहना है, "जिनके पास 1012 एकड़ जमीन है, हमारी कोशिश है वो हर एक किसान कम से कम एक एकड़ में जैविक खेती जरुर करें। बहुत ज्यादा संख्या में तो नहीं लेकिन किसानों ने जैविक खेती करने की शुरुआत कर दी है।"

Saturday, June 13, 2020

निजीकरण के बढ़ते पैर

मैं पैसे से एक शिक्षक हूँ और लिखने का भी शौक रखता हूँ। अपनी सोच आप सबके सामने रख रहा हूँ कृपया कोई भी गलत टिप्पणी ना करे।

निजीकरण के बढ़ते पैर
वो दिन दूर नहीं होगा कि गृह युद्ध की स्थिति पैदा ना हो।
बेरोजगार युवाओं को दिन-प्रतिदिन गुमराह किया जा रहा है। देश में बेरोजगारी एक दिन अपनी चरम सीमा पर हो जाएगी। देश प्रदेश में हर पाँच साल बाद विधायकों, सांसदों मंत्रियों के वेतन में वृद्धि की जाती है, हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाईं जाती हैं और एक बेरोजगार युवा योग्य होते हुए भी दर दर भटकता है, हर सम्भव कोशिश करता है, आखिर में थक हारकर उसके सपनों की चिता जल जाती है। क्या मजबूरी होती है या फिर क्या कमी होती है जो बेरोजगार युवा अपने सपने पूरा नहीं कर सकता।
ऐसी क्या मजबूरी है जो सरकार इन युवाओं के भविष्य की ओर ध्यान नहीं दे रही है? क्या ये युवा इस प्रदेश या फिर देश के नहीं हैं?
सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है? कौन जिम्मेदार है इस निजीकरण के पीछे कोई बता सकता है??? आखिर क्या मजबूरी है कि सरकारी संस्थाओं को निजीकरण के हवाले किया जा रहा है???
मैं उन सभी सरकारी कर्मचारियों से पूछना चाहूंगा कि क्या वे अपने लड़के लड़कियों को हर प्रकार से निजी व्यवसाय करने योग्य बना सकेंगे जो इस महंगाई की दुनियां में अपना जीवन यापन कर सकेंगे?
अगर निजीकरण के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो वो दिन दूर नहीं होगा जब बंधुआ मजदूरी करने के लिए बेरोजगार युवाओं को बेबस होना पड़ेगा।
मध्य प्रदेश में तो सरकारी स्कूलों का निजीकरण किया जा रहा है उन स्कूलों पर ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों कम होती जा रही है या फिर रिजल्ट अच्छा क्यों नहीं आ रहा है?
इसके पीछे क्या हो सकता है ऐसा ना कभी किसी शिक्षा मंत्री ने सोचा है? क्यों...
अगर समय रहते युवा सचेत ना हुए तो एक दिन सब कुछ हाथ से निकल जाएगा। दिन प्रति दिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और बढ़ती जाएगी। सोचा जाए कि जब अभी बेरोजगारी का ये हाल है तो आने वाले दिनों में तो हर सरकारी संस्थाओं का निजीकरण हो जाएगा और बेरोजगारों की संख्या दो से चार गुनी हो जाएगी तब क्या होगा? बेरोजगारी से बेहाल युवा कहीं गलती से भी गलत रास्ते पर चलने लग गया तो फिर क्या होगा देश का और उन युवाओं का जो मजबूरी बस गलत हो गया??
कौन होगा जिम्मेदार जिसने युवाओं को गलत रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किया??? फिर कोई विधायक या मंत्री ले सकेगा इसकी जिम्मेदारी???
समय रहते सम्भलने की जरूरत है और अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने की जरूरत है।

G.s.Kushwah

Saturday, July 21, 2018

           Shri G coaching classes                                   MATHEMATICS 

प्रयास करने वाला इंसान केवल एक बार ही गिरता है
प्रयास ना करने वाला इंसान जीवन भर गिरता रहता है

मेरे देश के हालात

 आज देश के हालात ऐसे हो गए हैं जिसके बारे में कुछ भी नहीं कह सकते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में राजनीति पूरी तरह से हावी हो चुकी है आज समय प्रत्...